स्वास्थ्य सेवा में AI

क्या आपका अस्पताल AI के लिए तैयार है? भारतीय अस्पतालों के लिए एक तैयारी चेकलिस्ट

एक भारतीय अस्पताल के लिए AI की तैयारी का मतलब क्या है: डिजिटल रिकॉर्ड, डेटा की गुणवत्ता, कोडिंग, सुरक्षा, गवर्नेंस और लोग। एक चेकलिस्ट, और शुरुआत कहां से करें।

यह अंग्रेज़ी में लिखे गए एक लेख का अनुवाद है। अगर यहां कोई बात अलग लगे, तो अंग्रेज़ी संस्करण को ही सही माना जाए।

आजकल हर अस्पताल को AI पेश किया जा रहा है: ऐसे स्क्राइब जो कंसल्ट नोट लिखते हैं, ऐसे टूल जो मरीज़ के इतिहास का सार तैयार करते हैं, ऐसे एजेंट (agents) जो कतार या फ़ार्मेसी की शेल्फ़ पर नज़र रखते हैं। कुछ अस्पतालों को इनसे असली फ़ायदा मिलेगा। बाकी कोई टूल खरीदेंगे, एक पायलट चलाएंगे, और पाएंगे कि वह उनके रिकॉर्ड पर काम नहीं करता।

फ़र्क की वजह शायद ही कभी AI होता है। असली बात यह है कि अस्पताल उसके लिए तैयार है या नहीं। यह लेख छह क्षेत्रों में बताता है कि व्यवहार में तैयारी का मतलब क्या है, और अंत में एक चेकलिस्ट है। यह भारत में अस्पताल मालिकों, मेडिकल डायरेक्टरों और IT प्रमुखों के लिए लिखा गया है।

संक्षेप में

  • पहले रिकॉर्ड। AI रिकॉर्ड पढ़ता है। अगर आपके रिकॉर्ड काग़ज़ पर या स्कैन की हुई PDF में हैं, तो वहीं से शुरू करें।
  • भरोसेमंद डेटा। डुप्लिकेट रिकॉर्ड, छूटी हुई जानकारी और गलत कोड गलत जवाब बन जाते हैं।
  • मानक। कोड किए गए निदान और जांचें, और डेटा के आदान-प्रदान का एक तरीका, आगे के हर कदम को सस्ता बना देते हैं।
  • सुरक्षा और सहमति। किसी भी AI के मरीज़ के डेटा को छूने से पहले, उस डेटा के लिए एक्सेस कंट्रोल, लॉग और एक क़ानूनी आधार चाहिए।
  • गवर्नेंस। किसी को जांचना होगा कि टूल आपके मरीज़ों पर काम करता है, और यह जांच लगातार करते रहना होगा।
  • लोग। एक समस्या चुनें, उसे मापें, और जो स्टाफ़ रोज़ उस समस्या से जूझता है, उसे समाधान तय करने दें।

1. ऐसे रिकॉर्ड जो डिजिटल, व्यवस्थित और एक जगह हों

AI डेटा पर काम करता है। हाथ से लिखी केस शीट को स्कैन करके बनी PDF एक तस्वीर है: कोई व्यक्ति उसे पढ़ सकता है, लेकिन कोई सिस्टम उसमें से ब्लड प्रेशर, निदान या दवा की खुराक भरोसे के साथ नहीं निकाल सकता। तैयारी की शुरुआत इससे होती है कि इलाज के समय ही रिकॉर्ड डेटा के रूप में दर्ज हों: वाइटल्स (vitals) संख्याओं के रूप में, निदान कोड की गई प्रविष्टियों के रूप में, और प्रिस्क्रिप्शन ऐसी पंक्तियों के रूप में जिनमें दवा, खुराक और कितनी बार लेनी है, यह दर्ज हो।

जांचने लायक तीन बातें:

  • एक मरीज़, एक रिकॉर्ड। अस्पताल के अंदर हर मरीज़ का एक ही पहचान नंबर (MRN या UID) होना चाहिए, और विज़िट, जांच के नतीजे और बिल सब उसी से जुड़े होने चाहिए। एक ही व्यक्ति के दो रिकॉर्ड उसके इतिहास को दो हिस्सों में बांट देते हैं, और कोई भी टूल जितना देख सकता है, उसे आधा कर देते हैं।
  • सब कुछ एक सिस्टम में, या आपस में जुड़ा हुआ। अगर OPD के नोट एक सिस्टम में हैं, लैब के नतीजे दूसरे में और फ़ार्मेसी काग़ज़ पर, तो कोई भी टूल पूरे मरीज़ को नहीं देख पाता।
  • जहां मरीज़ चाहे, वहां ABHA से जुड़ा हुआ। Ayushman Bharat Digital Mission सहमति के साथ रिकॉर्ड को मरीज़ के ABHA से जोड़ता है, जिससे दूसरी जगहों के रिकॉर्ड तक भी पहुंचा जा सकता है।

2. ऐसा डेटा जिस पर भरोसा किया जा सके

खराब डेटा पर प्रशिक्षित किया गया या चलाया गया मॉडल आत्मविश्वास के साथ गलत जवाब देता है। इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड के डेटा का अध्ययन करने वाले शोधकर्ता इसकी गुणवत्ता को कुछ आयामों में बताते हैं। एक व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली समीक्षा (review) ने इन्हें पांच में बांटा: डेटा पूरा (complete) है या नहीं, सही (correct) है या नहीं, दूसरे स्रोतों से मेल खाता (concordant) है या नहीं, विश्वसनीय लगता (plausible) है या नहीं, और ताज़ा (current) है या नहीं।

अस्पताल में यह ऐसे दिखता है: एलर्जी की जानकारी का गायब होना, किलोग्राम वाले फ़ील्ड में पाउंड में दर्ज वज़न, लेंस पावर में दशमलव की चूक, एक ही मरीज़ का दो अलग-अलग स्पेलिंग से दो बार रजिस्ट्रेशन, या कोई निदान मोटे तौर पर कोड कर देना क्योंकि सही कोड ढूंढने में बहुत समय लगता था।

इसे कैसे मापें और ठीक करें, यह हमने क्लिनिकल डेटा की गुणवत्ता: AI की शुरुआत साफ़ रिकॉर्ड से क्यों होती है में बताया है। छोटा जवाब यह है कि इसे बाद में किसी स्प्रेडशीट में नहीं, बल्कि जानकारी दर्ज करते समय ही ठीक करें।

3. कोड किया हुआ और मानक के अनुसार

मानक ही वह चीज़ हैं जिनसे डेटा एक जगह से दूसरी जगह जा सकता है और उसकी तुलना की जा सकती है:

  • ICD-10 निदानों के लिए, ताकि “टाइप 2 डायबिटीज़” एक ही चीज़ रहे, चाहे वह किसी भी तरह टाइप किया गया हो।
  • LOINC लैब जांचों के लिए, ताकि आपकी लैब का हीमोग्लोबिन और किसी बाहरी लैब का हीमोग्लोबिन एक ही चार्ट पर साथ-साथ रखे जा सकें।
  • FHIR R4 क्लिनिकल डेटा के आदान-प्रदान के लिए, और यही फ़ॉर्मेट ABDM इस्तेमाल करता है।
  • ABDM खुद, मरीज़ का इलाज करने वाले दूसरे प्रदाताओं के साथ सहमति के आधार पर डेटा साझा करने के लिए।

जिस अस्पताल के रिकॉर्ड इन मानकों के अनुसार कोड किए गए हैं, वह कोई नया टूल कहीं ज़्यादा तेज़ी से अपना सकता है, क्योंकि टूल को हर फ़ील्ड के लिए अलग से कस्टम मैपिंग (mapping) की ज़रूरत नहीं पड़ती।

4. इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा

कोई भी AI सिस्टम मरीज़ का डेटा पढ़े, इससे पहले बुनियादी चीज़ें तैयार होनी चाहिए:

  • इलाज की जगह पर उपकरण, ताकि डेटा बाद में टाइप होने के बजाय विज़िट के दौरान ही दर्ज हो;
  • भरोसेमंद कनेक्टिविटी, और उसके बंद होने पर क्या करना है इसकी योजना;
  • भूमिका (role) के आधार पर एक्सेस, ताकि हर व्यक्ति वही देखे जो उसके काम के लिए ज़रूरी है;
  • किसने क्या खोला और क्या बदला, इसका लॉग;
  • Digital Personal Data Protection Act, 2023 के तहत, मरीज़ के डेटा के इस्तेमाल के लिए क़ानूनी आधार और सहमति।

हर AI वेंडर से पूछें कि डेटा कहां जाता है, क्या वह भारत से बाहर जाता है, क्या उसका इस्तेमाल उनके मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए होता है, और अगर उसका दुरुपयोग हुआ तो आपको कैसे पता चलेगा।

5. गवर्नेंस: फ़ैसला कौन करे, और जांच कौन करे

क्लिनिकल AI के नाकाम होने का सबसे आम तरीका चुपचाप होता है: जहां वह बनाया गया, वहां काम करता है, और जहां इस्तेमाल होता है, वहां नहीं। इसका एक बहुत चर्चित उदाहरण सेप्सिस (sepsis) का अनुमान लगाने वाला एक मॉडल है, जो अमेरिका के कई अस्पतालों में इस्तेमाल होता था। जब Michigan Medicine के शोधकर्ताओं ने इसे 38,455 अस्पताल भर्तियों (hospital stays) पर जांचा, तो इसने सेप्सिस के 67% मामले छोड़ दिए, जबकि सभी मरीज़ों में से 18% पर अलर्ट दिया, और इसका AUC 0.63 था।

किसी भी अस्पताल के लिए सबक यह है कि किसी टूल पर भरोसा करने से पहले उसे अपने मरीज़ों पर परखें (validate), और लागू होने के बाद भी उसे मापते रहें। व्यवहार में इसका मतलब है:

  • एक नामित व्यक्ति या छोटी समिति, जो AI टूल को मंज़ूरी दे और उनकी समीक्षा की ज़िम्मेदारी ले;
  • हर टूल का लिखित उद्देश्य, और यह भी कि उसे क्या कभी नहीं करना है;
  • लागू करने से पहले स्थानीय डेटा पर जांच, और उसके बाद नियमित जांच;
  • क्लिनिकल किसी भी चीज़ के लिए, एक व्यक्ति जो AI के आउटपुट की समीक्षा उसके मरीज़ के रिकॉर्ड तक पहुंचने से पहले करे;
  • स्टाफ़ के लिए गलत जवाब की रिपोर्ट करने का एक तरीका, और उस पर क्या किया गया इसका रिकॉर्ड।

इसमें कई फ़्रेमवर्क मदद कर सकते हैं। ICMR की 2023 की Ethical Guidelines for Application of Artificial Intelligence in Biomedical Research and Healthcare भारत के लिए मुख्य संदर्भ हैं। WHO का 2021 का मार्गदर्शन छह सिद्धांत तय करता है, मानव स्वायत्तता की रक्षा से लेकर समावेशिता और समानता सुनिश्चित करने तक। NITI Aayog के Responsible AI पेपर (2021) भारत के लिए सात सिद्धांत तय करते हैं। एक औपचारिक प्रबंधन प्रणाली के लिए, ISO/IEC 42001:2023 किसी संगठन में AI के प्रबंधन का पहला अंतरराष्ट्रीय मानक है।

6. लोग और काम करने का तरीका

AI काम करने के तरीके को बदलता है, इसलिए काम से ही शुरुआत करें। ऐसी एक समस्या चुनें जिसे स्टाफ़ पहले से महसूस करता है, आज उसे मापें, उस पर एक टूल आज़माएं, और फिर से मापें।

डॉक्यूमेंटेशन आम तौर पर पहली पसंद होता है, और इस पर मौजूद सबूत जानने लायक हैं। 2025 में NEJM AI में प्रकाशित, UCLA में हुए एक रैंडमाइज़्ड ट्रायल (randomised trial) में पाया गया कि एक ऐम्बिएंट AI स्क्राइब (ambient AI scribe) ने सामान्य देखभाल की तुलना में नोट्स पर लगने वाला समय 9.5% कम किया, जबकि दूसरे से कोई उल्लेखनीय फ़र्क नहीं पड़ा। JAMA में 2026 के एक अध्ययन में, जिसमें 8,581 क्लिनिशियन शामिल थे, पाया गया कि स्क्राइब इस्तेमाल करने वालों ने हर आठ निर्धारित घंटों में डॉक्यूमेंटेशन पर लगभग 16 मिनट कम खर्च किए। लेखकों ने इस असर को मामूली बताया। यानी उपयोगी, लेकिन कोई जादू नहीं, और इसे अपनी खुद की OPD में मापना ज़रूरी है, जहां मरीज़ों की संख्या और कंसल्ट की अवधि किसी अमेरिकी क्लिनिक से बहुत अलग होती है।

NABH Digital Health Standards कहां फ़िट होते हैं

अस्पतालों की डिजिटल परिपक्वता मापने के लिए भारत के पास जो पैमाना है, उसके सबसे क़रीब NABH के Digital Health Standards ही हैं। अस्पतालों के लिए पहला संस्करण सितंबर 2023 में प्रकाशित हुआ। इसमें आठ अध्याय हैं, तीन क्लिनिकल और पांच नॉन-क्लिनिकल:

  1. पहुंच, आकलन और देखभाल की निरंतरता (Access, assessment and continuity of care)
  2. मरीज़ों की देखभाल (Care of patients)
  3. दवाओं का प्रबंधन (Management of medication)
  4. डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital infrastructure)
  5. डिजिटल संचालन प्रबंधन (Digital operations management)
  6. वित्त और ख़रीद प्रबंधन (Finance and procurement management)
  7. मानव संसाधन प्रबंधन (Human resource management)
  8. सूचना प्रबंधन प्रणाली (Information management system)

इन-पेशेंट या डे-केयर सेवाओं वाला कोई भी अस्पताल आवेदन कर सकता है, चाहे उसके पास NABH मान्यता (accreditation) हो या न हो। मान्यता Core से Excellence तक के परिपक्वता स्तरों पर दी जाती है, और यह दो साल तक मान्य रहती है। दूसरा संस्करण सितंबर 2025 में ड्राफ़्ट के रूप में जारी किया गया। NABH, HIS और EMR सॉफ़्टवेयर के लिए एक अलग मानक भी चलाता है, जिसके लिए ज़रूरी है कि सॉफ़्टवेयर के पास ABDM अनुपालन प्रमाणन (compliance certification) हो।

इन मानकों का इस्तेमाल करने के लिए आपको आवेदन करने की ज़रूरत नहीं है। इस लेख में बताए गए काम के लिए ये एक अच्छी तरह बनी हुई चेकलिस्ट हैं।

AI तैयारी की चेकलिस्ट

  1. क्या OPD नोट्स, प्रिस्क्रिप्शन और लैब के नतीजे काग़ज़ या स्कैन के बजाय व्यवस्थित डेटा के रूप में दर्ज होते हैं?
  2. क्या हर मरीज़ का अस्पताल में एक ही पहचान नंबर है, और क्या आप रजिस्ट्रेशन के समय डुप्लिकेट की जांच करते हैं?
  3. क्या निदान ICD-10 में कोड किए जाते हैं और लैब जांचें LOINC से मैप की जाती हैं?
  4. क्या आपके सिस्टम FHIR में डेटा का आदान-प्रदान कर सकते हैं, और सहमति के साथ रिकॉर्ड को ABHA से जोड़ सकते हैं?
  5. क्या आप जानते हैं कि आपके मुख्य फ़ील्ड (एलर्जी, वाइटल्स, निदान) कितने पूरे भरे हुए हैं?
  6. क्या स्टाफ़ के हर सदस्य का अपना लॉगिन है, भूमिका के आधार पर एक्सेस है, और क्या हर एक्सेस का लॉग रखा जाता है?
  7. क्या DPDP Act के तहत मरीज़ों के डेटा के लिए आपके पास क़ानूनी आधार और सहमति की प्रक्रिया है?
  8. क्या कोई नामित व्यक्ति या समिति है जो AI टूल को मंज़ूरी देती है और उनकी समीक्षा की ज़िम्मेदारी लेती है?
  9. क्या आप लागू करने से पहले किसी टूल को अपने मरीज़ों पर परखते हैं, और बाद में उसे मापते हैं?
  10. क्या AI का आउटपुट मरीज़ के रिकॉर्ड तक पहुंचने से पहले कोई व्यक्ति उसकी समीक्षा करता है?
  11. क्या आपने एक समस्या चुनी है, और मापा है कि आज वह कैसी चल रही है?
  12. क्या आपके स्टाफ़ को पता है कि AI की गलती की रिपोर्ट कैसे करें, और क्या कोई उस पर कार्रवाई करता है?

आठ या उससे ज़्यादा जवाब ‘हां’ हों, तो आप पायलट के लिए तैयार हैं। इससे कम हों, तो जो बिंदु छूट गए, वही आपका प्रोजेक्ट हैं।

92health इस पर अस्पतालों के साथ कैसे काम करता है

92health एक EMR और AI प्लेटफ़ॉर्म है, जिसे भारत में क्लिनिक, अस्पताल, फ़ार्मेसी, लैब और ऑप्टिकल शॉप इस्तेमाल करते हैं। ऊपर बताई गई तैयारी का ज़्यादातर काम इस बात में ही शामिल है कि यह इलाज को कैसे दर्ज करता है: हर अस्पताल में एक मरीज़ का एक रिकॉर्ड, ICD-10 में कोड किए गए निदान, FHIR R4 के रूप में सत्यापित लैब के नतीजे, ABHA से जोड़े जा सकने वाले रिकॉर्ड, भूमिका के आधार पर एक्सेस जिसमें हर बदलाव का लॉग रहता है, और मरीज़ों का डेटा जो भारत में ही रहता है।

इसके AI फ़ीचर हर जगह एक ही नियम मानते हैं: वे ड्राफ़्ट बनाते हैं, पढ़ते हैं या जवाब देते हैं, और नतीजे को मान्य माने जाने से पहले कोई व्यक्ति उसे जांचता है।

जो अस्पताल एक व्यवस्थित रास्ता चाहते हैं, उनके लिए हम AI तैयारी का काम तीन चरणों में करते हैं:

  1. आकलन। हम आपकी टीम के साथ छहों क्षेत्रों को देखते हैं और आपके रिकॉर्ड के एक नमूने की जांच करते हैं।
  2. योजना। आपको एक लिखित रिपोर्ट मिलती है: आप कहां खड़े हैं, पहले क्या ठीक करना है, और कौन सा AI इस्तेमाल सबसे पहले फ़ायदा देगा।
  3. निर्माण। हम नींव तैयार करने और पहला पायलट चलाने में आपकी मदद करते हैं, और पायलट शुरू होने से पहले बेसलाइन (baseline) मापी जाती है।

स्रोत

आम सवाल

किसी अस्पताल के AI के लिए तैयार होने का मतलब क्या है?
उसके रिकॉर्ड डिजिटल, व्यवस्थित (structured) और भरोसेमंद हों; निदान, जांचें और दवाएं मानकों के अनुसार कोड की गई हों; सिस्टम आपस में डेटा का आदान-प्रदान कर सकें; एक्सेस और सुरक्षा नियंत्रण में हों; और कोई व्यक्ति यह जांचने के लिए ज़िम्मेदार हो कि कोई AI टूल लागू होने से पहले और बाद में अस्पताल के अपने मरीज़ों पर ठीक से काम करता है।
क्या AI इस्तेमाल करने से पहले हमें EMR की ज़रूरत है?
लगभग हर क्लिनिकल इस्तेमाल के लिए, हां। AI रिकॉर्ड पढ़ता भी है और लिखता भी है, इसलिए उसे ऐसे रिकॉर्ड चाहिए जिन्हें वह पढ़ सके। हाथ से लिखे नोट की स्कैन की हुई PDF एक तस्वीर है, डेटा नहीं। ऐसा EMR जो व्यवस्थित फ़ील्ड्स (structured fields) में जानकारी दर्ज करे, वही नींव है जिस पर बाकी सब बनता है।
NABH Digital Health Standards क्या हैं?
यह NABH का एक कार्यक्रम है, जो अस्पतालों के लिए पहली बार सितंबर 2023 में प्रकाशित हुआ। यह मरीज़ों की देखभाल से लेकर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सूचना प्रबंधन तक, आठ अध्यायों में किसी अस्पताल की डिजिटल परिपक्वता का आकलन करता है। इन-पेशेंट या डे-केयर सेवाओं वाला कोई भी अस्पताल आवेदन कर सकता है, चाहे उसके पास NABH मान्यता (accreditation) हो या न हो।
अस्पताल में शुरुआत के लिए सबसे आसान AI इस्तेमाल कौन सा है?
डॉक्यूमेंटेशन (नोट लिखना) आम तौर पर शुरुआती बिंदु होता है, क्योंकि इसके नतीजे को जांचना आसान है: AI स्क्राइब (AI scribe) नोट का ड्राफ़्ट लिखता है और डॉक्टर उसमें सुधार करके उस पर हस्ताक्षर करते हैं। प्रकाशित ट्रायल असली लेकिन मामूली समय की बचत दिखाते हैं, इसलिए पहले और बाद में अपनी खुद की बेसलाइन (baseline) मापें।
भारतीय स्वास्थ्य सेवा में AI पर कौन से दिशानिर्देश लागू होते हैं?
ICMR ने 2023 में Ethical Guidelines for Application of Artificial Intelligence in Biomedical Research and Healthcare प्रकाशित कीं। स्वास्थ्य के लिए AI की नैतिकता और गवर्नेंस पर WHO का 2021 का मार्गदर्शन और NITI Aayog के Responsible AI पेपर भी व्यापक रूप से इस्तेमाल होते हैं। कोई भी AI सिस्टम जो निजी डेटा संभालता है, उस डेटा पर DPDP Act, 2023 लागू होता है।

यह लेख भारत के पाठकों के लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सामान्य जानकारी है। यह कोई निदान, दवा का पर्चा या डॉक्टर से सलाह का विकल्प नहीं है। खर्च, इलाज के तरीके और नियम हर क्लिनिक और राज्य में अलग होते हैं; जो भी बात ज़रूरी हो, उसकी पुष्टि अपने डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट से करें।