दंत चिकित्सा

भारत में डेंटल क्लिनिक सॉफ़्टवेयर: एक डेंटल EMR को क्या-क्या संभालना होता है

ओडोन्टोग्राम, पेरियो चार्टिंग, मेडिकल चेतावनियां और चरणों में बंटी इलाज योजनाएं: भारत में डेंटल क्लिनिक सॉफ़्टवेयर को क्या करना चाहिए, और किसी भी डेमो में क्या पूछें।

यह अंग्रेज़ी में लिखे गए एक लेख का अनुवाद है। अगर यहां कोई बात अलग लगे, तो अंग्रेज़ी संस्करण को ही सही माना जाए।

डेंटल क्लिनिक शिकायतों की सूची नहीं, मुंह का रिकॉर्ड रखता है। जांच में मिली हर बात किसी एक दांत से जुड़ी होती है, और अक्सर उस दांत की किसी एक सतह से। इलाज की योजना चरणों में बनती है और कई सिटिंग में पूरी होती है, कभी-कभी महीनों तक। योजना में से कितना करवाना है और कब, यह मरीज़ तय करता है। जो सॉफ़्टवेयर किसी जनरल प्रैक्टिशनर के कंसल्टेशन के लिए बना है, जिसमें जांच खुले टेक्स्ट में लिखी जाती है और आख़िर में एक पर्चा होता है, वह इनमें से लगभग कुछ भी नहीं संभाल पाता।

यह लेख बताता है कि डेंटल क्लिनिक सॉफ़्टवेयर को क्या-क्या संभालना होता है। इसे उन डेंटिस्ट और क्लिनिक मालिकों के लिए लिखा गया है जो अलग-अलग विकल्पों की तुलना कर रहे हैं। आख़िर में उन बातों की सूची है जो किसी भी डेमो में पूछनी चाहिए, हमारे डेमो में भी।

1. चार्ट ही मुंह है: ओडोन्टोग्राम

डेंटल रिकॉर्ड के केंद्र में ओडोन्टोग्राम (odontogram) होता है, यानी दांतों का एक चार्ट, जिस पर हर चीज़ वहीं दर्ज होती है जहां की वह है: नीचे की किसी दाढ़ (मोलर) की डिस्टल (distal) सतह पर सड़न (कैविटी), ऊपर के किसी प्रीमोलर दांत पर पुराना क्राउन (crown), कोई दांत जो मौजूद नहीं है, कोई योजनाबद्ध इम्प्लांट (implant)।

किन बातों पर ध्यान दें:

  • वही दांत-नंबरिंग जो डेंटिस्ट पहले से इस्तेमाल करते हैं। भारत में ज़्यादातर डेंटिस्ट FDI इस्तेमाल करते हैं; विदेश में ट्रेनिंग पाए कुछ डेंटिस्ट Universal या Palmer। सॉफ़्टवेयर को हर डेंटिस्ट की पसंद का नोटेशन दिखाना चाहिए, जबकि अंदर हर दांत की एक ही पहचान दर्ज रहे।
  • वयस्कों के दांत, बच्चों के दांत और मिले-जुले दांत (mixed dentition)। बच्चे के चार्ट में दांत अलग होते हैं, और मिले-जुले दांतों में दोनों तरह के दांत होते हैं।
  • सिर्फ़ दांत नहीं, उनकी सतहें भी। मीज़ियल (mesial), डिस्टल (distal), ऑक्लूज़ल (occlusal), बक्कल (buccal), लिंगुअल (lingual)। अगर कोई फ़िलिंग सिर्फ़ “दांत 36” के नाम पर दर्ज हो, तो अगली विज़िट में उसका ज़्यादा फ़ायदा नहीं होता।
  • पहले से मौजूद, योजनाबद्ध और पूरा हो चुका काम, अलग-अलग परतों में। मुंह में पहले से जो है और जो आप करने वाले हैं, उन्हें एक साथ मिला देने से ही योजनाएं ग़लत पढ़ी जाती हैं।
  • अपने आप अपडेट होने वाली गिनती। DMFT (decayed, missing, filled teeth: सड़े हुए, ग़ायब और भरे हुए दांत) अच्छी तरह रखे गए चार्ट से अपने आप निकल आता है, इसे अलग से जोड़ने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए।

2. डेटा के रूप में पीरियोडॉन्टल चार्टिंग

मसूड़ों की बीमारी पर सालों तक नज़र रखी जाती है, और यह काम पीरियोडॉन्टल चार्ट (periodontal chart) से होता है। इसमें हर दांत पर छह जगहों पर पॉकेट की गहराई (pocket depth) और मसूड़ों का पीछे हटना (recession) दर्ज होता है, उनसे निकाला गया क्लिनिकल अटैचमेंट लॉस (clinical attachment loss), और साथ में प्रोबिंग पर खून आना (bleeding on probing), दांत का हिलना (mobility) और फ़र्केशन इन्वॉल्वमेंट (furcation involvement)।

पूरे मुंह के लिए यह लगभग दो सौ अंक हो जाते हैं। सॉफ़्टवेयर में इन्हें जल्दी भरना आसान होना चाहिए (मुख्य रूप से कीबोर्ड से, एक जगह के बाद दूसरी), और हिसाब सॉफ़्टवेयर को ही करना चाहिए: अटैचमेंट लॉस, खून आने वाली जगहों का प्रतिशत, और पिछले चार्ट के बाद से आया बदलाव। जिन विज़िट में पूरे चार्ट की ज़रूरत नहीं होती, उनके लिए सेक्सटैंट (sextant) के हिसाब से एक बेसिक पीरियोडॉन्टल स्क्रीनिंग काम की होती है।

3. किसी भी प्रोसीजर से पहले मेडिकल चेतावनियां

एक डेंटिस्ट दिन में कई बार सिरिंज या फ़ॉरसेप्स (forceps) उठाता है। हर बार उससे पहले, मरीज़ के बारे में कुछ गिनी-चुनी बातें रिकॉर्ड की बाकी किसी भी चीज़ से ज़्यादा मायने रखती हैं:

  • पेनिसिलिन या लोकल एनेस्थेटिक (सुन्न करने की दवा) से एलर्जी;
  • खून पतला करने वाली दवाएं या दूसरे एंटीकोएगुलेंट (anticoagulants);
  • दिल की ऐसी बीमारी जिसमें कुछ प्रोसीजर से पहले एंटीबायोटिक कवर (antibiotic cover) की ज़रूरत होती है;
  • गर्भावस्था, डायबिटीज़, और तंबाकू या सुपारी का सेवन।

ये बातें एक बार दर्ज की जानी चाहिए, अपडेट रखी जानी चाहिए, और जब भी मरीज़ का चार्ट खुला हो तब स्क्रीन पर दिखनी चाहिए, न कि तीन साल पुराने किसी हिस्ट्री फ़ॉर्म में दबी रहें।

4. चरणों में बंटी इलाज योजनाएं

दांतों का इलाज आम तौर पर एक बार का काम नहीं, बल्कि एक योजना होता है: पहले तुरंत ज़रूरी इलाज, फिर बीमारी पर काबू, फिर रेस्टोरेशन (restoration), फिर कोई भी कॉस्मेटिक काम। हर चरण में प्रोसीजर होते हैं, हर प्रोसीजर का एक दांत और एक खर्च होता है, और मरीज़ पूरी योजना मान सकता है, उसका कुछ हिस्सा मान सकता है, या बाद में उस पर लौट सकता है।

सॉफ़्टवेयर को यह योजना चरणों में रखनी चाहिए, हर प्रोसीजर के खर्च के साथ, यह दर्ज करना चाहिए कि मरीज़ ने क्या मंज़ूर किया, और हर सिटिंग में जो काम हुआ उस पर निशान लगाने देना चाहिए। जब मरीज़ पूछे “अब क्या बाकी है और उसका कितना खर्च होगा”, तो जवाब एक ही स्क्रीन पर होना चाहिए।

5. कई सिटिंग में चलने वाला इलाज, और उसके साथ चलने वाला बिल

रूट कैनाल (root canal) में दो या तीन विज़िट लगती हैं और फिर एक क्राउन। इम्प्लांट में पहले उसे लगाया जाता है, फिर ठीक होने (हीलिंग) का समय होता है, और फिर रेस्टोरेशन। रिकॉर्ड को एक ही इलाज को उसकी सारी सिटिंग में साथ लेकर चलना होता है, और बिल को भी उसी के साथ चलना होता है: हर प्रोसीजर के हिसाब से, हर दांत के हिसाब से, जहां क्लिनिक एडवांस लेता है वहां एडवांस के साथ, और आख़िर में बाकी रकम। डेंटल लैब में बनने वाले क्राउन, ब्रिज और डेंचर (नकली दांत) एक और कदम जोड़ते हैं, जिस पर क्लिनिक को नज़र रखनी होती है।

6. इमेज और रिकॉर्ड

मुंह के अंदर के (इंट्राओरल) एक्स-रे और फ़ोटो डेंटल रिकॉर्ड का हिस्सा हैं, और सबसे ज़्यादा काम के तब होते हैं जब वे उसी दांत या विज़िट से जुड़े हों जिसे वे दिखाते हैं। आप जो भी सिस्टम देखें, उसमें पूछें कि इमेज चार्ट तक कैसे पहुंचती हैं, और क्या वे उस कागज़ पर छपती हैं जो मरीज़ घर ले जाता है।

7. क्लिनिक का बाकी काम

डेंटल क्लिनिक भी आख़िरकार अपॉइंटमेंट और फ़्रंट डेस्क, हर छह महीने पर मरीज़ों को दोबारा बुलाने (रिकॉल), पर्चों, भुगतानों और अक्सर एक छोटी डिस्पेंसरी के सहारे चलता है। जहां मरीज़ के पास ABHA हो, वहां रिकॉर्ड उससे जुड़ने चाहिए। जो सिस्टम ओडोन्टोग्राम तो अच्छी तरह करता है, लेकिन बिलिंग और रिमाइंडर के लिए आपको कहीं और भेजता है, वह हर दिन आपका समय खाता है।

किसी भी डेंटल EMR डेमो में पूछने लायक सवाल

वेंडर से कहें कि ये काम आपके सामने स्क्रीन पर करके दिखाएं:

  1. एक दांत की एक सतह पर कैविटी दर्ज करें, और दूसरे दांत पर पहले से मौजूद क्राउन।
  2. स्क्रीन पर नंबरिंग को FDI और Universal के बीच बदलें।
  3. एक पीरियोडॉन्टल चार्ट भरें और उसकी तुलना पिछले चार्ट से करें।
  4. किसी प्रोसीजर से पहले स्क्रीन पर कोई मेडिकल चेतावनी दिखाएं, जैसे एंटीकोएगुलेंट।
  5. खर्च के साथ चरणों में बंटी एक इलाज योजना बनाएं, और दर्ज करें कि मरीज़ ने उसका सिर्फ़ एक हिस्सा मंज़ूर किया।
  6. एक रूट कैनाल को तीन सिटिंग से होते हुए आख़िरी बिल तक ट्रैक करें।
  7. आपके मौजूदा रजिस्टर से दोबारा आए किसी मरीज़ को फ़ोन नंबर या पेशेंट ID से खोजें।

92health कहां फ़िट होता है

92health एक EMR है, जिसे भारत में क्लिनिक, अस्पताल, फ़ार्मेसी, लैब और चश्मे की दुकानें इस्तेमाल करती हैं। यह पूरा क्लिनिक चलाता है: रजिस्ट्रेशन और अपॉइंटमेंट, कंसल्टेशन, ई-प्रिस्क्रिप्शन, बिलिंग और भुगतान वसूली, और ऐसे रिकॉर्ड जिन्हें मरीज़ के ABHA से जोड़ा जा सकता है।

इसका डेंटिस्ट्री वर्कस्पेस ऊपर दी गई बातों को ध्यान में रखकर बनाया गया है:

  • FDI, Universal या Palmer में एक ओडोन्टोग्राम, वयस्कों, बच्चों और मिले-जुले दांतों के लिए, पहले से मौजूद, योजनाबद्ध और पूरे हो चुके काम की अलग-अलग परतों के साथ, और एक DMFT गिनती जो चार्ट करते-करते अपडेट होती रहती है।
  • एक पीरियोडॉन्टल चार्ट, हर दांत पर छह जगहों के साथ, आपके लिए अपने आप निकाला गया अटैचमेंट लॉस, प्रोबिंग पर खून आना, दांत का हिलना और फ़र्केशन।
  • मेडिकल चेतावनियां, पेनिसिलिन या एनेस्थेटिक से एलर्जी से लेकर एंटीकोएगुलेंट, गर्भावस्था, डायबिटीज़ और तंबाकू या सुपारी के सेवन तक, जो चार्ट के साथ ही दिखती हैं।
  • चरणों में बंटी इलाज योजनाएं, एक-एक प्रोसीजर करके, सारी सिटिंग में साथ चलती हुई।

अगर आप डेंटल क्लिनिक चलाते हैं और इसे अपने ही केस पर देखना चाहते हैं, तो डेमो बुक करें। ऊपर दिए सवाल साथ लाएं।

आम सवाल

डेंटल सॉफ़्टवेयर में ओडोन्टोग्राम क्या होता है?
मरीज़ के दांतों का एक चार्ट, जिस पर जांच में मिली हर बात, पहले से मौजूद हर रेस्टोरेशन (restoration) और हर योजनाबद्ध इलाज उसी दांत और उसी सतह पर दर्ज किया जाता है जिससे वह जुड़ा है। अच्छा ओडोन्टोग्राम अलग-अलग परतों में दिखाता है कि मुंह में पहले से क्या है, क्या करने की योजना है और क्या हो चुका है।
डेंटल सॉफ़्टवेयर में दांतों की कौन सी नंबरिंग होनी चाहिए?
भारत में ज़्यादातर डेंटिस्ट FDI की दो अंकों वाली प्रणाली इस्तेमाल करते हैं। सॉफ़्टवेयर ऐसा होना चाहिए कि हर डेंटिस्ट स्क्रीन पर दिखाने के लिए FDI, Universal या Palmer चुन सके, जबकि अंदर हर दांत की एक ही पहचान दर्ज रहे, ताकि जब मरीज़ किसी दूसरे डेंटिस्ट को दिखाए तब भी रिकॉर्ड सही रहें।
पीरियोडॉन्टल चार्ट में क्या दर्ज होना चाहिए?
हर दांत पर छह जगहों पर पॉकेट की गहराई (pocket depth) और मसूड़ों का पीछे हटना (recession), उनसे निकाला गया अटैचमेंट लॉस (attachment loss), प्रोबिंग पर खून आना (bleeding on probing), दांत का हिलना (mobility) और फ़र्केशन इन्वॉल्वमेंट (furcation involvement)। अंकों के रूप में दर्ज होने पर इस चार्ट की तुलना पिछले चार्ट से की जा सकती है।
क्या डेंटल क्लिनिकों को ABDM इंटीग्रेशन की ज़रूरत है?
ज़्यादातर निजी डेंटल क्लिनिकों के लिए आज यह स्वैच्छिक है। यह सबसे ज़्यादा तब मायने रखता है जब मरीज़ ABHA नंबर लेकर आते हैं और उम्मीद करते हैं कि उनकी विज़िट उससे जोड़ी जाए, और इसे बाद में जोड़ने के बजाय शुरू से रखना आसान होता है।
डेंटल EMR के डेमो में हमें क्या पूछना चाहिए?
डेमो में ये चीज़ें दिखाने को कहें: एक दांत की एक सतह पर दर्ज जांच की कोई बात, पिछले चार्ट से मिलाया गया पेरियो चार्ट, किसी प्रोसीजर से पहले दिखाई गई मेडिकल चेतावनी, खर्च के साथ चरणों में बंटी इलाज योजना, और कई सिटिंग में चलता हुआ रूट कैनाल, बिल बनने तक।

यह लेख भारत के पाठकों के लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सामान्य जानकारी है। यह कोई निदान, दवा का पर्चा या डॉक्टर से सलाह का विकल्प नहीं है। खर्च, इलाज के तरीके और नियम हर क्लिनिक और राज्य में अलग होते हैं; जो भी बात ज़रूरी हो, उसकी पुष्टि अपने डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट से करें।