नाक, कान, गला

भारत में ENT क्लिनिक सॉफ़्टवेयर: एक ENT EMR को क्या-क्या संभालना होता है

ENT विज़िट में जांच हिस्से और तरफ़ के हिसाब से दर्ज होती है, साथ में सुनने की जांचें, नाक की तैयारी और OPD प्रोसीजर होते हैं। ENT क्लिनिक सॉफ़्टवेयर को क्या करना चाहिए, और डेमो में क्या पूछें।

यह अंग्रेज़ी में लिखे गए एक लेख का अनुवाद है। अगर यहां कोई बात अलग लगे, तो अंग्रेज़ी संस्करण को ही सही माना जाए।

भारत में ज़्यादातर क्लिनिक सॉफ़्टवेयर एक जनरल फ़िज़िशियन के हिसाब से बने होते हैं: एक शिकायत, कुछ वाइटल्स (vitals), खुले शब्दों में लिखी जांच, एक निदान और एक पर्चा। ENT परामर्श इस ढांचे में फ़िट नहीं होता। जांच चार हिस्सों में, दो तरफ़ होती है, और बीच में कुछ संरचनाएं ऐसी होती हैं जो किसी भी तरफ़ की नहीं होतीं। काम के आधे आंकड़े उन जांचों से आते हैं जो डॉक्टर के मरीज़ को देखने से पहले नर्स करती है। और काफ़ी सारी विज़िट पर्चे की बजाय कमरे में ही किए गए किसी प्रोसीजर (procedure) पर ख़त्म होती हैं।

यह लेख बताता है कि ENT क्लिनिक सॉफ़्टवेयर को क्या-क्या संभालना होता है। यह उन क्लिनिक मालिकों और ENT सर्जनों के लिए लिखा गया है जो अलग-अलग विकल्पों की तुलना कर रहे हैं। आख़िर में उन बातों की एक छोटी सूची है जो किसी भी डेमो में पूछी जानी चाहिए, हमारे डेमो में भी।

1. जांच हिस्से और तरफ़ के हिसाब से दर्ज होती है

ENT जांच में कान, नाक और साइनस, गला और स्वरयंत्र (larynx), और गर्दन आते हैं। जांच के लगभग हर निष्कर्ष (finding) की एक तरफ़ होती है। दाईं तरफ़ धुंधला, अंदर की ओर खिंचा हुआ कान का पर्दा (eardrum) और बाईं तरफ़ सामान्य पर्दा, यह मरीज़ उल्टी स्थिति वाले मरीज़ से अलग है, और बिना तरफ़ बताए “TM retracted” लिखा नोट अगली विज़िट पर ज़्यादा काम का नहीं होता।

कुछ संरचनाओं की कोई तरफ़ होती ही नहीं: नाक की बीच की दीवार यानी सेप्टम (septum), गले की पिछली दीवार (posterior pharyngeal wall), स्वरयंत्र के कुछ हिस्से, थायरॉइड। जो सॉफ़्टवेयर सिर्फ़ “दायां” और “बायां” कॉलम देता है, वह डॉक्टर को मजबूर करता है कि या तो इनमें से एक चुने या निष्कर्ष को किसी कमेंट में टाइप करे।

किन बातों पर ध्यान दें:

  • हिस्से के हिसाब से, दाएं और बाएं कॉलम के साथ बनी जांच, और बीच की रेखा (midline) वाली संरचनाओं के लिए एक ही खाना।
  • पहले से सामान्य, असामान्य सिर्फ़ अपवाद में। ENT जांच का ज़्यादातर हिस्सा सामान्य होता है, और डॉक्टर को एक ही कदम में किसी हिस्से को सामान्य मार्क करके सिर्फ़ वही दर्ज करने की सुविधा होनी चाहिए जो अलग हो।
  • चुनने के लिए निष्कर्षों की एक शब्दावली, साथ में ऐसी कोई भी बात टाइप करने का विकल्प जो सूची में न हो। बंद सूची का नतीजा यह होता है कि निष्कर्ष ग़लत जगह दर्ज हो जाते हैं।
  • हिस्सों का क्रम विज़िट की वजह के हिसाब से होना चाहिए। चक्कर (vertigo) वाले मरीज़ का पहले कान जांचा जाता है, खर्राटे वाले मरीज़ की पहले नाक और गला।

2. सुनने की जांचें डेटा हैं, अटैचमेंट नहीं

प्योर-टोन ऑडियोमेट्री (pure-tone audiometry), टिम्पैनोमेट्री (tympanometry) और ट्यूनिंग फ़ोर्क (tuning fork) जांचें ओटोलॉजी (otology), यानी कान के इलाज, की रीढ़ हैं। कई क्लिनिकों में ये फ़ाइल के साथ स्टेपल की गई छपी रिपोर्ट के रूप में, या सॉफ़्टवेयर में स्कैन किए गए PDF के रूप में रहती हैं।

स्कैन को देखा जा सकता है। उसकी तुलना नहीं की जा सकती, उसका औसत नहीं निकाला जा सकता, उसे सारांश में छापा नहीं जा सकता। जब थ्रेशोल्ड (threshold) हर कान और हर पिच (pitch) के लिए अंकों में दर्ज होते हैं, तो सॉफ़्टवेयर ये कर सकता है:

  • हर कान का प्योर-टोन एवरेज (pure-tone average) निकालना और एयर-बोन गैप (air-bone gap) दिखाना, जिससे कंडक्टिव (conductive) और सेंसरीन्यूरल (sensorineural) हियरिंग लॉस में फ़र्क पता चलता है;
  • नतीजे को उस विज़िट सारांश पर डालना जो मरीज़ घर ले जाता है;
  • पिछले ऑडियोग्राम (audiogram) के बाद आया बदलाव दिखाना, जो ज़्यादातर फ़ॉलो-अप विज़िट में असली सवाल होता है;
  • नतीजे को हियरिंग एड (श्रवण यंत्र) के पर्चे तक ले जाना, ताकि मशीन किसी दर्ज जांच के आधार पर लगाई जाए।

यही बात टिम्पैनोग्राम के प्रकार और कान की नली के आयतन (ear canal volume), रिन्ने (Rinne) और वेबर (Weber) के नतीजों, और साइनस के लक्षणों के लिए SNOT-22 या चक्कर के लिए डिज़ीनेस हैंडीकैप स्कोर (dizziness handicap score) जैसी प्रश्नावलियों पर भी लागू होती है।

3. डॉक्टर से पहले नर्स की डेस्क

भीड़ वाली ENT OPD में डॉक्टर के आने से पहले बहुत कुछ होता है: बीमारी का इतिहास और शिकायतें, वाइटल्स, लक्षणों के स्कोर, सुनने की जांचें, और नाक की एंडोस्कोपी (nasal endoscopy) से पहले, नाक खोलने वाला (decongestant) और सुन्न करने वाला (anaesthetic) स्प्रे, जिसे असर करने में कई मिनट लगते हैं।

सॉफ़्टवेयर को नर्स को यह सब उसी क्रम में दर्ज करने की जगह देनी चाहिए जिसमें यह होता है, और मरीज़ को डॉक्टर के पास इस तरह सौंपना चाहिए कि शुरुआती जांच (work-up) पहले से स्क्रीन पर हो। नाक के स्प्रे का ज़िक्र अलग से बनता है: एक टाइमर जो दिखाए कि नाक में स्प्रे कब डाला गया और नाक कब तैयार होगी, डॉक्टर को बहुत जल्दी अंदर आने से और मरीज़ को ज़रूरत से ज़्यादा इंतज़ार करने से बचाता है।

4. तस्वीरें निष्कर्ष के पास होनी चाहिए

ओटोस्कोपी (otoscopy) और एंडोस्कोपी (endoscopy) की तस्वीरों से ही मरीज़ों को ENT निष्कर्ष समझाए जाते हैं और विज़िट के बीच उनकी तुलना होती है। ये तब सबसे ज़्यादा काम की होती हैं जब उन्हें उसी हिस्से और तरफ़ से जोड़ा जाए जिसे वे दिखाती हैं, न कि किसी आम “दस्तावेज़” फ़ोल्डर में रखा जाए। अगर आपका क्लिनिक वीडियो ओटोस्कोप या एंडोस्कोप इस्तेमाल करता है, तो पूछें कि उसकी स्थिर तस्वीरें (stills) चार्ट तक कैसे पहुंचती हैं, और क्या वे सारांश पर छपती हैं।

5. पर्चे में दवा से ज़्यादा होता है

ENT पर्चे के अक्सर दो हिस्से होते हैं: दवाएं, और हियरिंग एड का पर्चा, जिसमें लिखा होता है कि किस कान के लिए, किस तरह की मशीन, और किस जांच के आधार पर लगाई गई। दोनों जारी किए जाते हैं, छापे जाते हैं और कभी-कभी अलग-अलग जगह भेजे जाते हैं, इसलिए ये अलग-अलग दस्तावेज़ होने चाहिए जो एक ही विज़िट में रहें।

6. कमरे में होने वाले प्रोसीजर, और उसके बाद का बिल

कान का मैल निकालना, माइक्रोसक्शन (microsuction), कोई बाहरी चीज़ (foreign body) निकालना, नाक की एंडोस्कोपी, नकसीर के लिए कॉटरी (cautery), लैरिंगोस्कोपी (laryngoscopy): कई ENT विज़िट में कोई न कोई प्रोसीजर होता है। हर एक को विज़िट में दर्ज होना चाहिए और बिल में जुड़ना चाहिए, बिना इसके कि डॉक्टर फ़्रंट डेस्क के लिए किसी पर्ची पर लिखें। इलाज के कोर्स के लिए पैकेज, और परामर्श के बाद काउंटर पर किसी प्रोसीजर का बिल बनाने की सुविधा, दोनों यहां मायने रखते हैं।

7. सर्जरी एक अलग सफ़र है

टॉन्सिलेक्टॉमी (tonsillectomy), सेप्टोप्लास्टी (septoplasty), साइनस सर्जरी और कान की सर्जरी OPD में एक सलाह के रूप में शुरू होती हैं और फिर काउंसलिंग की बातचीत, ख़र्च का अनुमान, भर्ती और डिस्चार्ज बनती हैं। पूछें कि सॉफ़्टवेयर किसी केस को परामर्श से ऑपरेशन थिएटर की सूची तक कैसे ले जाता है, और ख़र्च का अनुमान, एडवांस और फ़ाइनल बिल आपस में कैसे जुड़े रहते हैं।

8. क्लिनिक का बाक़ी काम

ENT क्लिनिक आख़िर एक क्लिनिक ही है। इसे कतार (queue) और अपॉइंटमेंट चाहिए, एक फ़्रंट डेस्क जो बिना अपॉइंटमेंट आए मरीज़ों (walk-ins) को जल्दी रजिस्टर करे, बिलिंग और भुगतान वसूली, और अक्सर क्लिनिक के अंदर ही एक फ़ार्मेसी। जहां मरीज़ के पास ABHA हो, वहां रिकॉर्ड उससे जुड़े होने चाहिए। जो सॉफ़्टवेयर ENT जांच तो अच्छी तरह करे लेकिन बाक़ी कामों के लिए आपको तीन दूसरे सिस्टम पर भेजे, वह एक ऐसी क़ीमत है जो आप हर दिन चुकाएंगे।

किसी भी ENT EMR डेमो में पूछे जाने वाले सवाल

वेंडर से कहें कि ये काम आपके सामने स्क्रीन पर करके दिखाए:

  1. दाएं और बाएं कान में अलग-अलग निष्कर्ष, और एक टेढ़ा सेप्टम दर्ज करना।
  2. गले को एक ही कदम में सामान्य मार्क करना, फिर एक असामान्य निष्कर्ष दर्ज करना।
  3. एक ऑडियोग्राम दर्ज करना और हर कान का प्योर-टोन एवरेज और एयर-बोन गैप दिखाना।
  4. उस जांच से जुड़ा हियरिंग एड का पर्चा जारी करना।
  5. विज़िट के दौरान एक प्रोसीजर दर्ज करना और उसे फ़्रंट डेस्क पर बिल में दिखाना।
  6. वह विज़िट सारांश छापना जो मरीज़ घर ले जाता है।
  7. उसी मरीज़ की पिछली विज़िट खोलकर तुलना करना।
  8. दिखाना कि आपके मौजूदा रजिस्टर का कोई दोबारा आने वाला मरीज़ फ़ोन नंबर या पेशेंट ID से कैसे मिलता है।

92health कहां फ़िट होता है

92health एक EMR है जिसे भारत में क्लिनिक, आंखों के अस्पताल, फ़ार्मेसी, लैब और चश्मे की दुकानें इस्तेमाल करती हैं। यह पूरा क्लिनिक चलाता है: रजिस्ट्रेशन और OPD कतार, परामर्श, ई-प्रिस्क्रिप्शन, फ़ार्मेसी काउंटर, लैब ऑर्डर, बिलिंग और भुगतान वसूली, और इसके रिकॉर्ड मरीज़ के ABHA से जोड़े जा सकते हैं।

इसका ENT वर्कस्पेस ऊपर बताई गई बातों के इर्द-गिर्द बना है:

  • कान, नाक, गला और स्वरयंत्र, और गर्दन अलग-अलग हिस्सों के रूप में, हर एक में दाएं और बाएं कॉलम और बीच की रेखा के लिए एक-एक खाना। जांच के प्रीसेट (ओटोलॉजी, राइनोलॉजी, लैरिंगोलॉजी, सिर और गर्दन, चक्कर, नींद) हिस्सों का क्रम बदलते हैं; कुछ भी कभी छिपाया नहीं जाता।
  • हर संरचना के लिए निष्कर्षों की सूची, और जब सूची में उसके लिए कोई शब्द न हो तो टाइप किया गया टेक्स्ट उसी खाने में दर्ज होता है।
  • नर्स की शुरुआती जांच, जिसमें बीमारी का इतिहास, लक्षणों के स्कोर, वाइटल्स, नाक की तैयारी का टाइमर, सूंघने और ट्यूनिंग फ़ोर्क की जांचें, प्योर-टोन एवरेज के साथ ऑडियोमेट्री, टिम्पैनोमेट्री, और चक्कर और नींद की प्रश्नावलियां शामिल हैं।
  • तरफ़ के साथ निदान (दायां, बायां, दोनों या बीच की रेखा), डॉक्टर का नोट, और योजना में रखे गए प्रोसीजर।
  • दवा और हियरिंग एड के पर्चे, एक ही विज़िट में अलग-अलग दस्तावेज़ों के रूप में, एक ही स्क्रीन से छपे हुए।
  • दाएं और बाएं कॉलम वाला विज़िट सारांश, जिसमें वह प्योर-टोन एवरेज भी शामिल है जिसके आधार पर हियरिंग एड लगाया गया।

अगर आप चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै, सेलम, विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा या भारत में कहीं और ENT क्लिनिक चलाते हैं और इसे अपने ही केस पर देखना चाहते हैं, तो डेमो बुक करें। ऊपर दिए सवाल साथ लाएं।

आम सवाल

ENT क्लिनिक के लिए EMR और EHR में क्या फ़र्क है?
EMR क्लिनिक का अपना रिकॉर्ड है: उस क्लिनिक में दर्ज विज़िट, जांच के निष्कर्ष, पर्चे और बिल। EHR मरीज़ के साथ अलग-अलग इलाज देने वालों तक चलता है। भारत में इन दोनों के बीच का पुल ABHA है, यानी राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहचान संख्या, जिसके ज़रिए मरीज़ अपनी सहमति से अलग-अलग क्लिनिकों के रिकॉर्ड जोड़ सकता है।
क्या EMR में ऑडियोमेट्री (audiometry) के नतीजे स्कैन की हुई रिपोर्ट की बजाय डेटा के रूप में रखे जा सकते हैं?
रखे जाने चाहिए। जब हर कान और हर पिच (pitch) के लिए थ्रेशोल्ड (threshold) दर्ज होते हैं, तो सॉफ़्टवेयर प्योर-टोन एवरेज (pure-tone average) और एयर-बोन गैप (air-bone gap) निकाल सकता है, उन्हें विज़िट सारांश पर छाप सकता है और पिछली जांच से उनकी तुलना कर सकता है। स्कैन किया हुआ PDF सिर्फ़ देखा जा सकता है।
क्या ENT क्लिनिक को ABDM इंटीग्रेशन की ज़रूरत है?
ज़्यादातर निजी क्लिनिकों के लिए आज यह स्वैच्छिक है। इसकी सबसे ज़्यादा अहमियत तब होती है जब मरीज़ ABHA नंबर लेकर आते हैं और उम्मीद करते हैं कि उनकी विज़िट उससे जुड़ जाए, और इसे बाद में जोड़ने की बजाय शुरू से रखना आसान होता है।
किसी ENT क्लिनिक को नए EMR पर ले जाने में कितना समय लगता है?
एक OPD आम तौर पर कुछ ही दिनों में शुरू हो सकती है। धीमा हिस्सा शायद ही कभी सॉफ़्टवेयर होता है: असली काम है मौजूदा मरीज़ रजिस्टर को इम्पोर्ट करना, ताकि दोबारा आने वाले मरीज़ों के नंबर वही रहें, और यह तय करना कि नर्स की डेस्क पर कौन क्या दर्ज करेगा।
ENT EMR के डेमो में हमें क्या पूछना चाहिए?
दिखाने को कहें: दाएं और बाएं कान को अलग-अलग दर्ज करना, बीच की रेखा (midline) का कोई निष्कर्ष जैसे टेढ़ा सेप्टम (deviated septum), एक ऑडियोग्राम (audiogram) दर्ज करके छापना, हियरिंग एड का पर्चा, बिल में जोड़ा गया कोई प्रोसीजर, और वह विज़िट सारांश जो मरीज़ घर ले जाता है।

यह लेख भारत के पाठकों के लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सामान्य जानकारी है। यह कोई निदान, दवा का पर्चा या डॉक्टर से सलाह का विकल्प नहीं है। खर्च, इलाज के तरीके और नियम हर क्लिनिक और राज्य में अलग होते हैं; जो भी बात ज़रूरी हो, उसकी पुष्टि अपने डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट से करें।