ख़रीद ऑर्डर और GRN: क्लिनिक रिकॉल हुए बैच को मिनटों में कैसे ढूंढ़ता है
क्लिनिक, फ़ार्मेसी या आंखों के अस्पताल में हर ख़रीद, ख़रीद ऑर्डर से GRN, बैच और बिल तक एक ही चेन में क्यों चलनी चाहिए, ताकि रिकॉल हुई दवा या लेंस जल्दी ढूंढ़ा जा सके।
यह अंग्रेज़ी में लिखे गए एक लेख का अनुवाद है। अगर यहां कोई बात अलग लगे, तो अंग्रेज़ी संस्करण को ही सही माना जाए।
यह संदेश आम तौर पर WhatsApp पर आता है। कोई डिस्ट्रीब्यूटर, ड्रग इंस्पेक्टर (drug inspector) का सर्कुलर या CDSCO का मासिक ड्रग अलर्ट किसी दवा के एक बैच (batch) को मानक गुणवत्ता का नहीं (not of standard quality) बताता है, या कोई निर्माता आंख के अंदर लगाए जाने वाले लेंस (intraocular lens) का एक लॉट वापस मंगाता है, यानी रिकॉल (recall) करता है। तुरंत चार सवाल उठते हैं: क्या हमारे पास इसमें से कुछ है, वह कहां है, किस-किस को यह पहले ही मिल चुका है, और क्या हम क्रेडिट के लिए इसे वापस भेज सकते हैं?
मामला गंभीर है। अक्टूबर 2025 में तमिलनाडु में बने एक कफ़ सिरप के एक बैच में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (diethylene glycol) की मिलावट पाई गई और उसे मध्य प्रदेश में बच्चों की मौतों से जोड़ा गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने उसके और मुंह से ली जाने वाली दो और तरल दवाओं के लिए एक मेडिकल प्रोडक्ट अलर्ट जारी किया, और राज्यों ने इन्हें रिकॉल करने के आदेश दिए। जिस भी फ़ार्मेसी ने इन्हें स्टॉक किया था, उसे तुरंत यह जानना था कि क्या इनमें से कुछ अब भी उसके पास है।
जिस क्लिनिक के ख़रीद रिकॉर्ड अच्छे होते हैं, वह चारों सवालों का जवाब मिनटों में दे देता है। जिसके पास ये रिकॉर्ड नहीं होते, वह शेल्फ़-शेल्फ़ घूमता है, डिब्बे खोलता है, पुराने बिल हाथ से खंगालता है, और फिर भी पिछले हफ़्ते बिकी कोई स्ट्रिप छूट सकती है। फ़र्क इस बात का नहीं है कि आप कौन-सा सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल करते हैं। फ़र्क इस बात का है कि क्या हर ख़रीद एक ऐसी चेन से होकर गुज़रती है जो बैच नंबर को सप्लायर के इनवॉइस से लेकर मरीज़ के बिल तक बनाए रखती है।
यह लेख क्लिनिक, फ़ार्मेसी, आंखों के अस्पताल और छोटे अस्पतालों के मालिकों के लिए है, और उनके लिए भी जो स्टोर संभालते हैं। इसमें बताया गया है कि वह चेन क्या है, उसकी हर कड़ी पर क्या दर्ज करना है, रिकॉल आने पर उसे कैसे चलाना है, और भारत में कौन-से नियम लागू होते हैं।
चेन: ख़रीद ऑर्डर से मरीज़ तक
स्टॉक की हर यूनिट को पांच कड़ियों के सहारे ट्रेस किया जा सकना चाहिए:
- ख़रीद ऑर्डर (purchase order)। आपने सप्लायर से क्या मांगा, कितनी मात्रा और किस क़ीमत पर बात तय हुई, और ख़र्च करने का अधिकार रखने वाले किसी व्यक्ति की मंज़ूरी के साथ।
- माल प्राप्ति नोट (goods received note, GRN)। सप्लायर के इनवॉइस के मुक़ाबले असल में क्या आया: हर आइटम, उसके बैच या लॉट नंबर, निर्माण और एक्सपायरी (expiry) तारीख़, मात्रा, फ़्री मात्रा (free quantity), रेट (rate), MRP और टैक्स के साथ।
- बैच के हिसाब से स्टॉक। शेल्फ़ का स्टॉक हर दवा के लिए एक ही संख्या के बजाय बैचों के रूप में रखा जाए, ताकि आपको पता हो कि बैच B2407 की कितनी यूनिट बची हैं, सिर्फ़ यह नहीं कि कितनी स्ट्रिप हैं।
- इश्यू (issue)। हर बिक्री, डिस्पेंस, वार्ड इश्यू या ऑपरेशन थिएटर में इस्तेमाल पर लिखा हो कि वह किस बैच से आया। इम्प्लांट (implant) के मामले में, लॉट और सीरियल नंबर मरीज़ के रिकॉर्ड में जाते हैं।
- वापसी और बट्टे खाते (returns and write-offs)। सप्लायर को लौटाया गया स्टॉक, या एक्सपायरी या टूट-फूट के कारण बट्टे खाते में डाला गया स्टॉक, हर एक के साथ कारण और यह रिकॉर्ड कि किसने इसे मंज़ूर किया।
इनमें से कोई भी कड़ी टूटी, तो रिकॉल अंदाज़े का खेल बन जाता है। सबसे आम टूटनें हैं: माल आने के कई दिन बाद टाइप किया गया GRN, ग़लत दर्ज किया गया बैच नंबर, और बिना बैच के बिल की गई बिक्री।
सिर्फ़ GRN नहीं, ख़रीद ऑर्डर भी क्यों ज़रूरी है
कई फ़ार्मेसियां ख़रीद ऑर्डर छोड़ देती हैं और सिर्फ़ वह दर्ज करती हैं जो आता है। इसकी क़ीमत उन्हें तीन तरह से चुकानी पड़ती है:
- तीन-तरफ़ा मिलान (three-way match) नहीं होता। भुगतान से पहले ख़रीद ऑर्डर, GRN और सप्लायर के इनवॉइस का मिलान करने से कम सप्लाई, ग़लत आइटम, ग़लत रेट और कभी न आए माल के इनवॉइस पकड़ में आते हैं। ऑर्डर के बिना इनवॉइस का मिलान करने के लिए याददाश्त के सिवा कुछ नहीं होता।
- ख़रीद पर कोई नियंत्रण नहीं। मंज़ूर किए गए ऑर्डर का मतलब है कि किसी ने तय किया कि क्लिनिक को किसी महंगे इंजेक्शन की पचास वायल चाहिए। ऑर्डर न हो, तो स्टॉक इसलिए आता है क्योंकि किसी रिप्रेज़ेंटेटिव ने सुझाया था।
- बाक़ी माल का कोई रिकॉर्ड नहीं। जब सप्लायर माल टुकड़ों में भेजता है, तो ऑर्डर बताता है कि अभी क्या आना बाक़ी है। जो बैच अभी आया ही नहीं, उसके रिकॉल को रोकना, शेल्फ़ पर पहुंच चुके बैच के मुक़ाबले आसान होता है।
हर GRN पर क्या दर्ज करें
इन्हें उसी दिन दर्ज करें जिस दिन माल आता है, जब डिब्बा आपके सामने खुला हो:
- सप्लायर का इनवॉइस: नंबर, तारीख़ और सप्लायर का GSTIN, और इनवॉइस की फ़ोटो या PDF, GRN के साथ जुड़ी हुई।
- हर लाइन के लिए बैच या लॉट नंबर, निर्माण तारीख़ और एक्सपायरी तारीख़, जैसा पैक पर छपा है।
- मिली मात्रा और फ़्री मात्रा अलग-अलग संख्याओं के रूप में, ताकि “10 पर 1 फ़्री” जैसी स्कीम से प्रति यूनिट लागत न बिगड़े।
- इनवॉइस के अनुसार रेट, MRP और GST।
- जो भी चीज़ एक-एक यूनिट करके बेची या लगाई जाती है, उसके सीरियल नंबर: आंख के अंदर लगने वाले लेंस, स्टेंट, हड्डियों के इम्प्लांट, सुनने की मशीनें।
जहां पैक पर बारकोड या QR कोड हो, उसे स्कैन करें। 1 अगस्त 2023 से, Drugs Rules की Schedule H2 में सूचीबद्ध 300 ब्रांडों पर ऐसा कोड होना ज़रूरी है जिसमें प्रोडक्ट कोड, बैच नंबर, और निर्माण व एक्सपायरी तारीख़ दर्ज हों। 1 जुलाई 2027 से यह शर्त सभी टीकों, NDPS दवाओं और कैंसर-रोधी दवाओं पर, और 1 जुलाई 2028 से सभी एंटीमाइक्रोबियल दवाओं पर लागू होती है। स्कैन किया गया बैच नंबर कभी ग़लत टाइप नहीं होता।
Drugs Rules इससे कम मांगते हैं। Rule 65 के अनुसार रिटेलर के ख़रीद रिकॉर्ड में तारीख़, सप्लायर और उसका पता व लाइसेंस नंबर, दवा, मात्रा, बैच नंबर और निर्माता दर्ज होना चाहिए; इसमें एक्सपायरी तारीख़ ज़रूरी नहीं है। फिर भी उसे दर्ज करें: एक्सपायरी से ही तय होता है कि कौन-सी यूनिट पहले बेचनी है और कौन-सी वापस भेजनी है।
छह चरणों में रिकॉल चलाना
जब कोई अलर्ट किसी बैच का नाम ले, तो हर बार यही चरण अपनाएं, और जो किया उसे लिखकर रखें।
- ढूंढ़ें। हर स्टोर और काउंटर पर बैच नंबर से अपना स्टॉक खोजें। आपको अभी हाथ में मौजूद यूनिट चाहिए, और यह भी कि हर यूनिट किस GRN पर आई थी, जिससे सप्लायर और इनवॉइस का पता चलता है।
- रोकें। बैच को तुरंत बिक्री से हटाएं और उसे “Not for sale” (बिक्री के लिए नहीं) लिखे ताले वाले अलग क्षेत्र (quarantine) में रखें। रात की शिफ़्ट समेत हर काउंटर को बताएं। आपके पास जितनी मात्रा है, उसकी जानकारी अपने सप्लायर और इलाक़े के ड्रग इंस्पेक्टर को दें।
- पता करें कि यह किसे मिला। हर उस बिल, डिस्पेंस, वार्ड इश्यू या इम्प्लांट की सूची बनाएं जिसमें इस बैच का इस्तेमाल हुआ, मरीज़ और उसके फ़ोन नंबर के साथ। दवा हो, तो अलर्ट या निर्माता फ़ार्मेसियों से जो कहे, वह करें। इम्प्लांट हो, तो सर्जन तय करते हैं कि किससे संपर्क करना है और कितनी जल्दी।
- वापस भेजें। डेबिट नोट (debit note) के साथ यूनिट सप्लायर को लौटाएं, या अगर सप्लायर या ड्रग इंस्पेक्टर कहें तो उन्हें अलग रखे क्षेत्र में ही रहने दें।
- ठीक तरीक़े से बट्टे खाते में डालें। जो यूनिट लौटाई न जा सकें, उन्हें कारण के साथ, ज़िम्मेदार व्यक्ति की मंज़ूरी से, बट्टे खाते में डाला जाता है, ताकि स्टॉक और खाते आपस में मेल खाएं।
- फ़ाइल रखें। अलर्ट, मिली यूनिट, जिन मरीज़ों से संपर्क किया गया, वापसी और तारीख़ें। अगर कोई इंस्पेक्टर या एक्रेडिटेशन असेसर (accreditation assessor) पूछे कि आपने यह कैसे संभाला, तो यही आपका जवाब है।
इसे एक बार अभ्यास (drill) के तौर पर, किसी ऐसे बैच पर चलाकर देखें जिसे किसी ने रिकॉल नहीं किया, ताकि पता चले कि हर चरण में कितना समय लगता है। पहला अभ्यास आम तौर पर दिखा देता है कि कौन-सी कड़ी टूटी हुई है।
भारत में लागू होने वाले नियम
- CDSCO के रिकॉल दिशानिर्देश। Guidelines on Recall and Rapid Alert System for Drugs (मौजूदा संस्करण 18 जुलाई 2024 से लागू) रिकॉल को जोखिम के आधार पर बांटते हैं। Class I, जहां इस्तेमाल से गंभीर नुक़सान या मौत हो सकती है, उपभोक्ता तक पहुंचता है: बिक्री 24 घंटे के अंदर रुकनी चाहिए और रिकॉल 72 घंटे में पूरा होना चाहिए। Class II, जहां नुक़सान अस्थायी हो या उसके गंभीर होने की संभावना कम हो, 10 दिनों के अंदर रिटेल स्तर तक पहुंचता है। Class III, जहां नुक़सान की संभावना नहीं है, 30 दिनों के अंदर होलसेल स्तर तक पहुंचता है। दिशानिर्देश इस चेन में फ़ार्मेसियों, अस्पताल फ़ार्मेसियों, दवा देने वाले डॉक्टरों, क्लिनिकों और नर्सिंग होम का नाम लेते हैं, और हर एक से उम्मीद करते हैं कि वह अपने स्टॉक की जानकारी सप्लायर और इलाक़े के ड्रग इंस्पेक्टर को दे, रिकॉल हुए स्टॉक को ताले में अलग रखे, और नोटिस व वापसी के रिकॉर्ड जांच के लिए संभालकर रखे।
- मासिक ड्रग अलर्ट। CDSCO हर महीने उन दवा सैंपलों की सूची प्रकाशित करता है जिन्हें केंद्रीय और राज्य प्रयोगशालाओं ने मानक गुणवत्ता का नहीं, या नकली (spurious), पाया; इसमें प्रोडक्ट, निर्माता और बैच का नाम होता है, और यह सूची उसकी वेबसाइट के एक खोजे जा सकने वाले पेज पर होती है। सिर्फ़ अगस्त 2026 में ही 220 सैंपल मानक गुणवत्ता के नहीं बताए गए। जिस निर्माता का बैच सूची में होता है, उससे उसे रिकॉल करने को कहा जाता है। हर महीने इस सूची का अपने स्टॉक से मिलान करना सबसे सस्ता रिकॉल अभ्यास है।
- Drugs Rules के तहत रिटेल रिकॉर्ड। रिटेल ड्रग लाइसेंस के साथ Drugs Rules, 1945 के Rule 65 के तहत रिकॉर्ड रखने की शर्तें आती हैं: बैच नंबर सहित ख़रीद रिकॉर्ड, Schedule C, H और H1 दवाओं के बिक्री रिकॉर्ड जिनमें बैच और एक्सपायरी दिखे, और एक अलग Schedule H1 रजिस्टर जिसमें पर्चा लिखने वाले डॉक्टर, मरीज़, दवा और मात्रा दर्ज हो, जो तीन साल तक रखा जाता है। बाक़ी रिकॉर्ड आख़िरी एंट्री से कम से कम दो साल तक रखे जाते हैं, और वापसी का इंतज़ार कर रहा एक्सपायर्ड स्टॉक अलग रखा जाता है और उस पर “Not for sale” लिखा जाता है।
- GST रिकॉर्ड। CGST Act और उसके नियमों के तहत, किसी रजिस्टर्ड कारोबार को मिले और सप्लाई किए गए माल का, और स्टॉक का हिसाब रखना होता है, और उसे उस साल के वार्षिक रिटर्न की नियत तारीख़ से 72 महीने तक संभालकर रखना होता है।
- मेडिकल डिवाइस। Medical Devices Rules, 2017 के तहत आंख के अंदर लगाए जाने वाले लेंस Class C मेडिकल डिवाइस हैं। Rule 89 के अनुसार, जिस निर्माता को लगे कि कोई डिवाइस असुरक्षित हो सकता है, उसे वह डिवाइस “बाज़ार और मरीज़ों से” (“from the market and patients”) वापस लेना होता है और नियामक को सूचित करना होता है। डिवाइस से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं (adverse events) की रिपोर्ट Materiovigilance Programme of India के ज़रिए की जाती है। जो अस्पताल हर इम्प्लांट का लॉट और सीरियल नंबर मरीज़ से जोड़कर दर्ज करता है, वह किसी डिवाइस रिकॉल का जवाब एक ही खोज में दे सकता है।
- एक्रेडिटेशन (accreditation)। NABH के अस्पताल मानक (6वां संस्करण, जनवरी 2025) इम्प्लांट और डिवाइस को दवा की श्रेणी में गिनते हैं। वे उम्मीद करते हैं कि हर इम्प्लांट का बैच और सीरियल नंबर मरीज़ के मेडिकल रिकॉर्ड, मास्टर लॉगबुक (master logbook) और डिस्चार्ज समरी (discharge summary) में दर्ज हो, और दवा व इम्प्लांट के रिकॉल प्रभावी ढंग से संभाले जाएं।
नियम बदलते रहते हैं और कुछ नियम राज्य-दर-राज्य अलग होते हैं। मौजूदा स्थिति अपने ड्रग इंस्पेक्टर या क़ानूनी सलाहकार से पक्की कर लें।
क्लिनिक आम तौर पर यह चेन कहां तोड़ते हैं
- इनवॉइस के ढेर से महीने के आख़िर में दर्ज किए गए GRN, जिससे शेल्फ़ और सिस्टम हफ़्तों तक मेल नहीं खाते।
- हर दवा का एक ही बैच, जिसमें हर नई डिलीवरी उसी लाइन में जोड़ दी जाती है, जिससे शेल्फ़ पर रखा बैच वह नहीं होता जो सिस्टम में है।
- ऐसे बिल जिन पर बैच का नाम नहीं होता, जिससे कोई नहीं बता सकता कि रिकॉल हुई स्ट्रिप किसे मिली।
- सिर्फ़ काग़ज़ पर दर्ज इम्प्लांट, या सिर्फ़ मॉडल और पावर से दर्ज इम्प्लांट, जिससे लॉट और सीरियल नंबर खोजे नहीं जा सकते।
- बिना कारण के बट्टे खाते, जिससे एक्सपायर्ड स्टॉक, टूट-फूट और गुम हुआ माल सब एक जैसे दिखते हैं, और किसी ने उन्हें मंज़ूर नहीं किया होता।
इसमें 92health की भूमिका
92health किसी क्लिनिक, उसकी फ़ार्मेसी, उसकी चश्मे की दुकान और उसके ऑपरेशन थिएटर के लिए यह चेन एक ही सिस्टम में रखता है:
- मंज़ूरी के साथ ख़रीद ऑर्डर, और उनके मुक़ाबले सप्लायर का इनवॉइस जोड़कर रिसीव किया गया माल; बिना इनवॉइस वाले GRN के लिए कारण देना होता है और वह मंज़ूरी देने वाले के पास जाता है;
- सप्लायर का इनवॉइस फ़ोटो से GRN में पढ़ा जा सकता है, और हर लाइन पर बैच, एक्सपायरी, मात्रा, फ़्री मात्रा, रेट और GST दर्ज होते हैं;
- बैच के हिसाब से रखा गया स्टॉक, जिसमें सबसे पहले एक्सपायर होने वाला माल पहले बिकता है, और हर बिल लाइन पर बैच और एक्सपायरी छपी होती है;
- एक स्टॉक लेजर (stock ledger) जिसे बैच नंबर से खोजा जा सकता है, और जो उस बैच की हर आवाजाही दिखाता है: मिला, बिका, एडजस्ट हुआ या बट्टे खाते में गया;
- दवा के हिसाब से बिक्री रिपोर्ट, जो किसी भी अवधि के लिए उस दवा का हर ग्राहक और हर बिल दिखाती है;
- किसी भी अवधि के लिए Schedule H1 बिक्री रजिस्टर का डाउनलोड;
- आंखों के अस्पतालों के लिए, सीरियल नंबर के हिसाब से आंख के अंदर लगाए जाने वाले लेंस का रजिस्टर, और एक रिकॉल सूची जो लॉट, सीरियल, मॉडल या पावर देने पर दिखाती है कि किन मरीज़ों में वह लेंस लगा है, उनके फ़ोन नंबर के साथ, और कौन-सी यूनिट अब भी शेल्फ़ पर हैं;
- बट्टे खाते और स्टॉक सुधार, जो कारण के साथ मंज़ूरी से होकर गुज़रते हैं, और थिएटर स्टोर से सप्लायर को वापसी;
- दर्ज हो चुके GRN में सुधार, जो मंज़ूरी से होकर गुज़रते हैं और स्टॉक, खाते और देनदारियां (payables) एक साथ बदलते हैं;
- GRN से ही भुगतान के लिए तैयार सप्लायर बिल, जो अपने ख़रीद ऑर्डर से जुड़े होते हैं।
अगर आप चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै, विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा या भारत में कहीं और फ़ार्मेसी या अस्पताल का स्टोर चलाते हैं और अपने ही स्टॉक पर रिकॉल का अभ्यास देखना चाहते हैं, तो डेमो बुक करें।
स्रोत
- Central Drugs Standard Control Organisation, Guidelines on Recall and Rapid Alert System for Drugs (including Biologicals and Vaccines), संस्करण 2024, 18 जुलाई 2024 से लागू।
- Central Drugs Standard Control Organisation, मानक गुणवत्ता की नहीं और नकली दवाओं पर मासिक ड्रग अलर्ट; अगस्त 2026 के अलर्ट पर प्रेस रिपोर्टें।
- Drugs Rules, 1945, Rule 65; G.S.R. 823(E), 17 नवंबर 2022 (Schedule H2); G.S.R. 506(E), 22 जून 2026 (Schedule H2 का विस्तार)।
- Medical Devices Rules, 2017, Rules 26 और 89; मेडिकल डिवाइस का CDSCO वर्गीकरण (आंख के अंदर लगाया जाने वाला लेंस, Class C); Materiovigilance Programme of India, Indian Pharmacopoeia Commission।
- NABH, Accreditation Standards for Hospitals, 6वां संस्करण, Management of Medication वाला अध्याय (MOM.6 और MOM.10)।
- World Health Organization, Medical Product Alert N°5/2025, 13 अक्टूबर 2025।
- Central Goods and Services Tax Act, 2017, धाराएं 35 और 36, और CGST Rules, 2017, rule 56।
आम सवाल
- फ़ार्मेसी में GRN क्या होता है?
- माल प्राप्ति नोट (goods received note, GRN) यह दर्ज करता है कि सप्लायर से असल में क्या आया: सप्लायर के इनवॉइस के मुक़ाबले हर आइटम, उसका बैच नंबर, एक्सपायरी तारीख़, मात्रा, फ़्री मात्रा, रेट और टैक्स। यही वह पल है जब स्टॉक आपके खातों में आता है, और यही वह रिकॉर्ड है जिससे आप बाद में किसी बैच को ढूंढ़ते हैं।
- ख़रीद ऑर्डर और GRN में क्या फ़र्क है?
- ख़रीद ऑर्डर वह है जो आपने कुछ भी आने से पहले, तय की गई क़ीमत पर, सप्लायर से मांगा। GRN वह है जो आपको मिला। दोनों का आपस में मिलान करने से, और दोनों का सप्लायर के इनवॉइस से मिलान करने से, भुगतान से पहले ही कम सप्लाई, ग़लत आइटम और ग़लत क़ीमतें पकड़ में आ जाती हैं।
- किसी दवा का बैच रिकॉल होने पर फ़ार्मेसी को क्या करना चाहिए?
- उसकी बिक्री रोक दें, अपनी शेल्फ़ों पर उसकी हर यूनिट ढूंढ़ें, उसे ताले में अलग रखें, अपने पास मौजूद स्टॉक की जानकारी अपने सप्लायर और इलाक़े के ड्रग इंस्पेक्टर को दें, और रिकॉल नोटिस व वापसी के रिकॉर्ड संभालकर रखें। CDSCO के दिशानिर्देशों के तहत Class I रिकॉल में बिक्री 24 घंटे के अंदर रुकनी चाहिए और रिकॉल 72 घंटे के अंदर पूरा होना चाहिए।
- भारत में किन दवाओं पर QR कोड या बारकोड होता है?
- 1 अगस्त 2023 से, Drugs Rules की Schedule H2 में सूचीबद्ध 300 ब्रांडों पर ऐसा बारकोड या QR कोड होना ज़रूरी है जिसमें बैच नंबर, निर्माण तारीख़ और एक्सपायरी तारीख़ हो। 1 जुलाई 2027 से यह नियम सभी टीकों, NDPS और कैंसर-रोधी दवाओं पर, और 1 जुलाई 2028 से सभी एंटीमाइक्रोबियल (antimicrobial) दवाओं पर लागू होता है।
- फ़ार्मेसी को ख़रीद और Schedule H1 के रिकॉर्ड कितने समय तक रखने होते हैं?
- Drugs Rules के तहत Schedule H1 रजिस्टर तीन साल तक रखा जाता है, और ज़्यादातर बाक़ी रिटेल रिकॉर्ड आख़िरी एंट्री से कम से कम दो साल तक। GST क़ानून के तहत, मिले और सप्लाई किए गए माल के हिसाब, स्टॉक समेत, उस साल के वार्षिक रिटर्न की नियत तारीख़ से 72 महीने तक रखे जाते हैं। जो सबसे लंबी अवधि लागू हो, उसका पालन करें।
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